PSYCHOLOGICAL TRAUMA

EVERY RAPED GIRL SUFFERS RAPE EVEN AFTER RESCUE

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नई दिल्‍ली। बलात्‍कार के तीन दिन बाद वह लड़की दिल्‍ली के एक सरकारी अस्‍पताल में सफेद रंग की चादर पर लेटी थी। आस पास का माहौल थोड़ा आश्‍चर्यजनक बनता जा रहा था। अचानक एक नर्स आई और उसने लड़की की सलवार खोली और उसकी कमीज को नाभि के ऊपर तक खिसका दिया। इसके थोड़ी देर बाद दो पुरुष डाक्‍टर आए और लड़की की जांघों के पास हाथ लगाकर जांच शुरू कर दी। वहीं लड़की ने बिना कुछ बोले अपने शरीर को कड़ा कर लिया। अचानक दस्‍ताने पहने हुए हाथों की दो उंगलियां लड़की के वजाइना के अंदर पहुंच गईं। वह दर्द से कराह उठी। डॉक्‍टर कांच की स्‍लाइड्स पर उंगलियां साफ करके लड़की को वहीं छोड़कर वहां से चलते बने। जांच से पहले न तो लड़की से किसी तरह की इजाजत ली गई और न ही उसे इसके बारे में कुछ बताया गया कि उन्‍होंने ऐसा क्‍या और क्‍यों किया। जी हां, इसी को टू फिंगर टेस्ट कहा जाता है। वैसे तो टू फिंगर टेस्ट के लिए कोई कानून नहीं हैं, इसीलिए देशभर में यह बेधड़क जारी है।

देश में प्रचलित टू फिंगर टेस्‍ट से बलात्कार पीड़ित महिला की वजाइना के लचीलेपन की जांच की जाती है। अंदर प्रवेश की गई उंगलियों की संख्या से डॉक्टर अपनी राय देता है कि ‘महिला सक्रिय सेक्स लाइफ’ में है या नहीं।

किसी पर बलात्कार का आरोप लगा देना, उसे सजा दिलाने के लिए काफी नहीं है। बलात्कार हुआ है, यह सिद्ध करना पड़ता है और इसके लिए डॉक्टर टू फिंगर टेस्ट करते हैं।

यह एक बेहद विवादास्पद परीक्षण है, जिसके तहत महिला की योनी में उंगलियां डालकर अंदरूनी चोटों की जांच की जाती है। यह भी जांचा जाता है कि दुष्कर्म की शिकार महिला संभोग की आदी है या नहीं।

कई देशों में इसे वर्जिनिटी टेस्ट भी कहा जाता है। इसके जरिए महिला के कौमार्य की जांच की जाती है। डॉक्टर उंगलियों के ही जरिए यह पता लगाते हैं कि हायमन यानि यौन झिल्ली मौजूद है या नहीं।

इसके अलावा योनि के लचीलेपन से यह पता लगाया जाता है कि संभोग जबरन हुआ या फिर महिला की मर्जी से। विश्व स्वास्थ्य संगठन इस परीक्षण को बेबुनियाद घोषित कर इसे रोकने की मांग कर चुका है।

भारत में 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने टू फिंगर टेस्ट को बलात्कार पीड़िता के अधिकारों का हनन और मानसिक पीड़ा देने वाला बताते हुए खारिज कर दिया। अदालत का कहना था कि सरकार को इस तरह के परीक्षण को खत्म कर कोई दूसरा तरीका अपनाना चाहिए।

इंडोनेशिया में पुलिस में भर्ती के लिए महिलाओं पर यह टेस्ट किया जाता है। मानवधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने इसकी निंदा करते हुए इसे चिंताजनक बताया।

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Author: Sanjeev Kumar

i am a social activist running an organistion (people for the empowerment of womanhood - PEW) the moto for the organistion to emopowerwomen and gross level . And i am also a environmemtalist to save envrionment from the curel and greedy people .

3 thoughts on “PSYCHOLOGICAL TRAUMA”

  1. I think its relly harsh…a women is suffering from a rape.. uske bad 2finger test krke..kya sbit krna chaa rahe.. it should be stop… There will be some other ways also..bt it should not be tolerated.. a victom is is already suffering from so much pain and psycological troma and this make her more hlepless… this kind off test should be stop… friends i think we should shares this more and more in the public so that more and more people should known about it alest…this should be stop….

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  2. I think its relly harsh…a women is suffering from a rape.. uske bad 2finger test krke..kya sbit krna chaa rahe.. it should be stop… There will be some other ways also..bt it should not be tolerated.. victom is is already suffering from so much pain and psycological troma and this make her more hlepless… this kind off test should be stop… friends i think we should shares this more and more in the public so that more and more people should known about it alest…this should be stop….

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